वुहान लैब पर अमेरिका की रिपोर्ट फ़र्जी : चीन

अजय राज मीणा: वुहान लैब पर अमेरिका की रिपोर्ट को चीन ने फ़र्जी बता दिया है। अमेरिका के एक अख़बार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में रविवार को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक “COVID-19 की शुरुआत से पहले साल 2019 के नवंबर महीने में वुहान लैब के तीन शोधकर्ता ऐसी बीमारी से जूझ रहे थे जिसके लक्षण COVID-19 की तरह थे।

 

covid 19 news update in hindi

 

चीन इस तरह के दावों को शुरू से ही ग़लत बताता आया है विशेषज्ञों का मानना है कि यह COVID-19 नाम का वायरस चीन से ही फैला है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ‘डॉनाल्ड ट्रम्प’ कोरोना वायरस को ‘चीनी वायरस’ और ‘वुहान वायरस’ कहते थे हालांकि ‘ट्रम्प’ के इन शब्दों पर चीन शुरू से ही आपत्ति ज़ाहिर करता आया है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ चीन ने पहली बार 31 दिसंबर 2019 को WHO को यह जानकारी दी थी, कि वुहान शहर में ‘निमोनिया’ के केस अचानक बढ़ रहे हैं इसके बाद सम्पूर्ण संसार को इस वायरस की पहचान हुई और आज इसी वायरस के कारण देश के लगभग 35 लाख लोगों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है।

 

क्या है अमेरिका का मक़सद?

चीन ने इस मामले को लेकर अमेरिका पर सवाल उठाए और कहा- ऐसी बहुत सारी रिपोर्ट सामने आयी हैं साल 2019 के दूसरे हिस्से में दुनिया में वायरस और COVID-19 के मौजूद होने की बात कही है। चाओ लिजियान ने कहा “कि वायरस वुहान की लैब से लीक होने की थ्योरी को बार-बार क्यों उछाला जा रहा है? उन्होंने पूछा कि इसके पीछे अमेरिका का ख़ास मक़सद क्या है? वह इस वायरस का पता लगाने के लिए सीरियस है या फिर सब का ध्यान बांटने की कोशिश में जुटा है।”

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लिजियान से फिर पूछा गया है कि क्या वह इस को सिद्ध कर सकते हैं? कि नवंबर 2019 में ‘इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी’ के तीन शोधकर्ता बीमार होकर अस्पताल गए या नहीं? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि “मैंने वुहान इंस्टीट्यूट के बयान के आधार पर चीन का पक्ष रखा है इसलिए जिस भी रिपोर्ट में यह 3 शोधकर्ताओं के बीमार होने वाली ख़बर है वह पूरी तरह झूठी है।

दरअसल अमेरिका के एक अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में छपी ख़बर के मुताबिक़ वुहान लैब के 3 शोधकर्ता नवंबर 2019 में बीमार पड़े और उस दौरान उन्होंने अस्पताल की मदद मांगी। आप को बता दें कि अखबार में यह ख़बर अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट के हवाले से छपी थी।

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