हरियाणा के किसानों की लगी लॉटरी, यहा गेंहू बेचने पर मिल रही है ज्यादा कीमत

अनाज का सबसे बड़ा बाजार | जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि पिछले कुछ समय से रूस व युक्रेन के बीच संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष के बीच भारतीय गेहूं की मांग बढ़ गई है। पंजाब और अन्य गेहूं उत्पादक राज्यों में प्राइवेट प्लेयर द्वारा फसल खरीद में वृद्धि देखी गई है। रूस और यूक्रेन दोनों दुनिया भर में दो प्रमुख निर्यातक हैं और दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष के कारण भारत में निजी खरीदारों द्वारा गेहूं की खरीद में वृद्धि हुई है।

खन्ना अनाज बाजार एशिया का सबसे बड़ा अनाज बाजार

खन्ना अनाज बाजार को एशिया का सबसे बड़ा अनाज बाजार कहा जाता है। खन्ना के आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष हरबंस सिंह रोशा ने पुष्टि की कि कई निजी खरीदारों ने उनसे संपर्क किया, लेकिन उनमें से कई खाली हाथ लौट आए क्योंकि पंजाब खाद्यान्न खरीदारों पर भारी बाजार शुल्क लगाता है।

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पंजाब से हरियाणा वापिस जा रहे हैं खरीददार

पंजाब गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। लेकिन विडम्बना की बात है पंजाब सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य होने के बावजूद, कई निजी खाद्यान्न खरीदारों को आकर्षित करने में सक्षम नहीं है। वे पड़ोसी राज्य हरियाणा वापस जा रहे हैं, जहां बाजार शुल्क नगण्य है। पंजाब छह प्रतिशत बाजार शुल्क लेता है। पड़ोसी हरियाणा में यह सिर्फ एक प्रतिशत है। ऐसे में हरियाणा के किसानों की भी लॉटरी लगी है।

 

शायद गेहूं लक्ष्य से चूक जाए पंजाब

लगातार सूखे और बढ़ते तापमान के कारण सिकुड़े अनाज की समस्या के बाद पंजाब इस साल गेहूं की कटाई के लक्ष्य से चूक सकता है। हालांकि पंजाब के लगभग सभी जिले के किसान सूखे अनाज की समस्या का सामना कर रहे है, लेकिन रूपनगर, पटियाला और फतेहगढ़ साहिब जिलों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आम तौर पर किसानों को प्रति एकड़ 22 क्विंटल तक मिलता है, लेकिन इस साल इसे घटाकर 13 से 14 क्विंटल कर दिया गया है।किसान पहले ही राज्य के विभिन्न खाद्यान्न मंडियों में बड़ी मात्रा में गेहूं फेंक चुके हैं। राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार, 14.9 लाख मीट्रिक टन गेहूं बाजारों में आ गया था, जिसमें से 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद हो चुकी है।