केंद्र सरकार ने मूंग,‌ बाजरे के न्यूनतम समर्थन मूल्य में किया इजाफा, इन क्षेत्रों के किसानों को मिली बड़ी राहत

न्यूनतम समर्थन मूल्य | केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में इजाफा कर किसानों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने मूंग व बाजरे की फसल पर 100 से लेकर 480 रुपये तक की बढ़ोतरी की है. इससे दक्षिण हरियाणा के रेतीले क्षेत्र के किसानों का भविष्य अच्छा बनाने का काम किया है. इसी के साथ कपास की फसल के मूल्यों में भी 355 रुपयों का इजाफा किया गया है. इससे काली मिट्टी वाले किसानों को फायदा मिलेगा.

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इन क्षेत्रों के किसानों को होगा फायदा:

  • मूंग, बाजरे की सबसे अधिक खेती दक्षिण हरियाणा के दादरी, रेवाड़ी,नारनौल, भिवानी, हिसार जिलों की रेतीली भूमि में की जाती है. मूंग व बाजरा कम खाद और पानी में भी अच्छा उत्पादन देती है.
  • मौजूदा खरीफ सीजन में बाजरे के मौजूदा भाव में 100 रूपये की वृद्धि की गई है. इसका मतलब बाजरे के 2250 रुपये के भाव में ₹100 की वृद्धि कर दी गई है और बाजरे का मौजूदा भाव अब 2350 रुपये हो गया है.
  • इसी के साथ मूंग के मौजूदा भाव 7275 में 480 रुपये की वृद्धि हुई है. इसकी वृद्धि से 6 जिलों के किसानों को बड़ा सहारा मिला है.
    सरकार ने कपास के भाव में भी ₹355 की बढ़ोतरी कर किसानों को राहत दी है.
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केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को बढ़ाने के फैसले से लोहारु, सतनाली, झोझू, बाढड़ा, तोशाम के गिरते हुए भूमि जल स्तर वाले क्षेत्र के किसान अब उन फसलों पर कम ध्यान देंगे जो ज्यादा सिंचाई वाली फसलें होती है. इसके बजाए वे बाजरे, मूंग पर फोकस रखेंगे. इससे कम जल स्तर वाले क्षेत्रों का पानी भी बचेगा और कम लागत में अच्छा मुनाफा भी पा सकेंगे.

आत्मनिर्भर होंगे किसान:

केंद्र सरकार द्वारा नए भाव लागू किए जाने पर किसान सतपाल श्योराण, गोपालदास, धर्मबीर बडराई, आदि ने केंद्र सरकार के इस कदम को किसानों के आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अच्छा कदम बताया है. उनका कहना है कि नए भाव लागू किए जाने से किसान को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम साबित होंगे. इसी के साथ किसानों ने सरकार से रसायनिक खादों की बजाय जैविक खादों के लिए गांव-गांव में शिविर आयोजित करने की मांग की है.

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सुखविद्र मांढी जो भाजपा किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व विधायक है, उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के न्यूनतम समर्थन मूल्यों पर वृद्धि का ऐतिहासिक फैसला लिया है. उनका कहना है कि आज किसान की कृषि के लिए ही नहीं बल्कि किसानों की संतान की उच्च शिक्षा के लिए भाजपा सरकार ने 7 सालों में 35 सरकारी कॉलेज आईटीआई(ITI) नए भवन बनाकर संचालित की गई हैं.

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