Corona Latest News 2022: लंबे समय तक कोरोना संक्रमण रहने से गंभीर खतरा, Heart Beat पर भी पड़ सकता है असर – रिसर्च

Corona Latest News 2022 : लंबे समय तक कोविड संक्रमण के साइड इफेक्ट: कोरोना संक्रमण होने के बाद लंबे समय से मरीजों में अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि जिन लोगों को लंबे समय से कोविड का संक्रमण है,

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Corona Latest News : लंबे समय तक रहे कोविड संक्रमण के साइड इफेक्ट: पिछले 2 साल में कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. इस जानलेवा बीमारी ने जहां लाखों लोगों की जान ले ली है, वहीं करोड़ों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। बीमारी से ठीक होने के बाद भी लोगों में पोस्ट कोविड के कई लक्षण देखने को मिल रहे हैं। उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें ठीक होने में काफी समय लग सकता है। हाल ही में कोरोना की तीसरी लहर ने दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. नए वेरिएंट (Omicron) ने भी कई देशों में कहर बरपा रखा है. इसी बीच एक शोध सामने आया है जिसमें कहा गया है कि जो लोग लंबे समय से कोरोना संक्रमित हैं, उनके शरीर पर इसका बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है और उन्हें गंभीर खतरा है। लंबे संक्रमण के बाद ऐसे मरीजों की धड़कन भी प्रभावित हो सकती है।

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एक शोध में दी गई जानकारी के अनुसार, लंबे समय तक कोरोना संक्रमण के कारण, यह शरीर के वेगस तंत्रिका की दक्षता को प्रभावित करता है और कार्य क्षमता को कम करता है। इस वजह से इसका असर दिल की धड़कन पर भी पड़ सकता है। वेगस तंत्रिका हमारे दिल की धड़कन और बोलने की हमारी क्षमता को भी निर्धारित करती है। यह तंत्रिका हमारे मस्तिष्क से धड़ तक जाती है और हृदय, फेफड़े और आंतों तक फैली हुई है।
यह तंत्रिका हमारे शरीर के लिए कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह भोजन को निगलने में हमारे गले की मांसपेशियों को भी नियंत्रित करता है। इसके साथ ही दिल की धड़कन, बोलने की क्षमता, पसीना और शरीर की अन्य गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है।

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रिसर्च में सामने आई ये बात (Corona Latest News )

लंबे समय से कोरोना संक्रमित मरीजों पर किए गए इस शोध को स्पेन के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल जर्मन्स ट्रायस आई पुंजोल के शोधकर्ताओं ने किया है. शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर लंबे समय तक कोरोना संक्रमित रहता है तो मरीजों की वीगन नसों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसके कारण मरीजों को बोलने में कठिनाई, भोजन निगलने में कठिनाई, चक्कर आना, असामान्य दिल की धड़कन जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है।

शोधकर्ता डॉ. जेम्मा लाडोस का कहना है कि इस शोध में सामने आए नतीजे लंबे समय से कोरोना संक्रमित मरीजों में होने वाली अन्य समस्याओं को समझने में मदद कर सकते हैं. डॉ. लाडोस ने कहा कि लंबे समय तक रहने वाला कोरोना संक्रमण संभावित रूप से शरीर के कई अंगों का एक सिंड्रोम है, जो 10-15 फीसदी लोगों को प्रभावित कर सकता है. ये लक्षण हफ्तों से लेकर एक साल तक बने रह सकते हैं।

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शोध दल द्वारा उनके शोध में 348 रोगियों को शामिल किया गया। इस दौरान लगभग 66 प्रतिशत रोगियों ने इस तंत्रिका की कार्यक्षमता में कमी के कारण कम से कम एक लक्षण 14 महीने तक बने रहने की शिकायत की। इस शोध के संबंध में एक व्यावहारिक अध्ययन अप्रैल 2022 में लिस्बन में आयोजित होने वाले यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ECCMID 2022) में प्रस्तुत किया जाएगा।

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